सुपरस्टार रजनीकांज हुए 66 साल के, रजनीकांत को 66 वें जन्मदिन की बधाई

सुपरस्टार रजनीकांत (शिवजी  रॉ  गायकवाड़)  के 66वें जन्मदिन की हार्दिक बधाई | मेगास्टार अमिताभ बच्चन और अनुभवी अभिनेता अनुपम खेर सहित कई सितारों ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है।

रजनीकांत ने 1975 से फिल्म ‘अपूर्व रागंगल’ के साथ अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम कर अपने अभिनय का लोहा मनवाया। रजनीकांत ने ‘बुलंदी’, ‘आतंक ही आतंक’, ‘इंसानियत के देवता’, ‘हम’ और ‘खून का कर्ज’ जैसी शानदार हिंदी फिल्मों में काम किया है। सुपरस्टार रजनीकांत के प्रशंसक उनका जन्मदिन भव्य तौर पर मनाना चाहते हैं, लेकिन रजनीकांत ने तमिलनाडु में आई तबाही के कारण सभी योजनाएं रद्द करने का आग्रह किया है।

आइये आज आपको रजनीकांत के बारे में कुछ ऐसी बातें बताते है जो आपको शायद नही पता होंगी|

रजनीकांत ने अपना करियर एक कारपेंटर के रूप में शुरू करा था| रजनीकांत पहले कारपेंटर बने फिर उन्होंने कुली का काम किया फिर कुली से बी.टी.एस. कंडक्टर और फिर एक कंडक्टर से विश्व के सबसे ज्यादा प्रसिद्ध सुपरस्टार| सबसे ज्यादा प्रसिद्ध सुपरस्टार बनने तक का सफ़र कितना परिश्रम भरा होगा ये हम सोच सकते हैं|

रजनीकांत का जीवन ही नहीं बल्कि फिल्मी सफ़र भी कई उतार चढ़ावों से भरा रहा है| जिस मुकाम पर आज रजनीकांत हैं उसके लिए जितना परिश्रम और त्याग चाहिए होता है शायद रजनीकांत ने उससे ज्यादा ही किया है|

रजनीकांत का जन्म 12 दिसम्बर 1950 को बैंगलोर में एक बेहद मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में हुआ था| ये चार भाई बहन थे| उनका जीवन शुरुआत से ही मुश्किलों भरा रहा, मात्र पांच वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपनी माँ को खो दिया था| पिता पुलिस में एक हवलदार थे और घर की माली स्तिथि ठीक नहीं थी| रजनीकांत ने युवावस्था में कुली के तौर पर अपने काम की शुरुआत की फिर वे ब.टी.एस में बस कंडक्टर (bus conductor) की नौकरी करने लगे|

वो कंडक्टरी करते थे पर उनका अंदाज निराला था| वो अपनी अलग तरह से टिकट काटने और सीटी मारने की शैली को लेकर यात्रियों और दुसरे बस कंडक्टरों के बीच विख्यात थे| कई मंचों पर नाटक करने के कारण फिल्मों और एक्टिंग के लिए शौक तो हमेशा से ही था और वही शौक धीरे धीरे जुनून में तब्दील हो गया|
लिहाज़ा उन्होंने अपना काम छोड़ कर चेन्नई के अद्यार फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला ले लिया| वहां इंस्टिट्यूट में एक नाटक के दौरान उस समय के मशहूर फिल्म निर्देशक के. बालाचंदर की नज़र रजनीकांत पर पड़ी और वो रजनीकांत से इतना प्रभावित हुए कि वहीँ उन्हें अपनी फिल्म में एक चरित्र निभाने का प्रस्ताव दे डाला| फिल्म का नाम था अपूर्व रागांगल| रजनीकांत की ये पहली फिल्म थी|

रजनीकांत ने पहले नकारात्मक चरित्र और विलेन के किरदार से शुरुआत की, फिर साइड रोल किये और आखिरकार एक हीरो के तौर पर अपनी पहचान बनाई|

रजनीकांत ने यह साबित कर दिया की उम्र केवल एक संख्या है और अगर व्यक्ति में कुछ करने की ठान ले तो उम्र कोई मायने नहीं रखती| 66 वर्ष के उम्र के पड़ाव पर वे आज भी वे सुपर स्टार से काम नही है
रजनीकांत आज इतने बड़े सुपर सितारे होने के बावजूद ज़मीन से जुड़े हुए हैं| वे फिल्मों के बाहर असल जिंदगी में एक सामान्य व्यक्ति की तरह ही दिखते है| वे दूसरे सफल लोगों से विपरीत असल जिंदगी में धोती-कुर्ता पहनते है| शायद इसीलिए उनके प्रशंसक उन्हें प्यार ही नहीं करते बल्कि उनको पूजते हैं|

उनके पास कोई भी व्यक्ति मदद मांगने आता है वे उसे खाली हाथ नहीं भेजते| रजनीकांत कितने प्रिय सितारे हैं, इस बात का पता इसी से लगाया जा सकता है कि दक्षिण में उनके नाम से उनके प्रशंशकों ने एक मंदिर बनाया है| इस तरह का प्यार और सत्कार शायद ही दुनिया के किसी सितारे को मिला हो|