अगर आप PM होते तो आपके भाई ये सब नही करते ,जानिए मोदी के पूरे परिवार की कहानी

आजकल जैसे राजनीति में हर तरफ परिवार में वाद विवाद का बोलबाला हो रहा है| सियासी परिवारों में कलह की खबरें लगातार सुर्ख‍ियों में बानी है| ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार पर एक नजर डालना जरूरी है।
इस देश में परिवार में अगर एक सदस्य पॉलिटिक्स में जाये तो पूरे परिवार की किस्मत बदल देता है| वो अकेला ही परिवार की 7 पुश्तों का आराम से जीने का इंतजाम कर देता है
हमारे आज के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जिनके हाथ में पूरे देश की सियासत है | उनका परिवार एक सामान्य जीवन जी रहा है | आपको जान कर आश्चर्य होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के भाई-भतीजे और परिवार के दूसरे सदस्य उनकी ऊंची अहमियत से दूर लगभग अनजान-सी जिंदगी जी रहे हैं। परिवार में या तो कोई फिटर के पद से रिटायर हुआ है या तो कोई पेट्रोल पंप पर सहायक है कोई कबाड़ का बिजनेस भी करता है या फिर कोई पतंग बेच कर आपन जीवन पालन कर रहा है|


परिवार का कोई भी सदस्य न तो कभी हवाई जहाज में बैठा है न ही कभी किसी अच्छे होटल में कहा खाया है
अक्टूबर में पुणे में एक एनजीओ के कार्यक्रम में 75 वर्षीय सोमभाई मोदी मंच पर मौजूद थे। तभी उन्होंने बताया वो नरेंद्र मोदी के सबसे बड़े भाई है  |उन्होंने कुछ ऐसा कहा कि कार्यक्रम आये लोग आशचर्य चकित रहे गए |उन्होंने कहा ,”मेरे और प्रधानमंत्री मोदी के बीच एक परदा है. मैं उसे देख सकता हूं पर आप नहीं देख सकते. मैं नरेंद्र मोदी का भाई हूं, प्रधानमंत्री का नहीं. प्रधानमंत्री मोदी के लिए तो मैं 123 करोड़ देशवासियों में से ही एक हूं, जो सभी उनके भाई-बहन हैं.”

सोमभाई प्रधानमंत्री मोदी से पिछले ढाई साल से नहीं मिले हैं, जब से उन्होंने देश की गद्दी संभाली है. भाइयों के बीच सिर्फ फोन पर ही बात हुई है. उनसे छोटे पंकज इस मामले में थोड़ा किस्मत वाले हैं. गुजरात सूचना विभाग में अफसर पंकज की भेंट अपने मशहूर भाई से इसलिए हो जाती है कि उनकी मां हीराबेन उन्हीं के साथ गांधीनगर के तीन कमरे के सामान्य-से घर में रहती हैं. प्रधानमंत्री अपनी मां से मिलने के लिए जाते रहते है|
चाय की दुकान के मालिक दामोदरदास मूलचंद मोदी और उनकी गृहिणी पत्नी हीराबेन के छह बच्चे थे उनमे से से तीसरे नंबर के प्रधानमंत्री मोदी|
यह लोगों को उनके निःस्वार्थ जीवन के बारे में बताने में उपयोगी है. हाल में नोटबंदी के बमुश्किल हफ्ते भर बाद 14 नवंबर को मोदी ने गोवा की एक सभा में कुछ भावुक होकर कहा, ”मैं इतनी ऊंची कुर्सी पर बैठने के लिए पैदा नहीं हुआ. मेरा जो कुछ था, मेरा परिवार, मेरा घर…मैं सब कुछ देशसेवा के लिए छोड़ आया.” यह कहते समय उनका गला भर्रा गया था|
अगर आप गुजरात का एक चक्कर भी लगा लेंगे तो आपको खुद ही पता चल जायेगा मोदी जी अपने परिवार को कितना पीछे छोड़ आए, मोदी जी का कुनबा आज भी उसी तरह गुमनाम मध्यवर्गीय जिंदगी जी रहा है जैसी वह 2001 में नरेंद्र भार्ई के पहली बार मुख्यमंत्री बनने के समय जीता था.

एक और बड़े भाई 72 वर्षीय अमृतभाई एक प्राइवेट कंपनी में फिटर के पद से रिटायर हुए हैं. 2005 में उनकी तनख्वाह महज 10,000 रु. थी.  वे अब अहमदाबाद के घाटलोदिया इलाके में चार कमरे के मध्यवर्गीय आवास में रिटायरमेंट के बाद वाला जीवन जी रहे हैं. उनका बेटा, 47 वर्षीय संजय, उसकी पत्नी और दो बच्चे रहते हैं. संजय छोटा-मोटा कारोबार चलाते हैं. संजय के बेटे नीरव और बेटी निराली दोनों इंजीनियरिंग पढ़ रहे हैं. आइटीआइ पास कर चुके संजय अपनी लेथ मशीन पर छोटे-मोटे कल-पुर्जे बनाते हैं और ठीक-ठाक जीवन जी रहे हैं
सत्ताधर रिहाइशी सोसाइटी में हर कोई जानता है कि अमृतभाई प्रधानमंत्री के भाई हैं. लेकिन स्थानीय किंवदंतियों पर यकीन करें तो संजय का जिस बैंक में खाता है, उसके अधिकारी इस तथ्य से परिचित नहीं हैं. उनके बेटे प्रियांक को हाल में पैसा निकालने के लिए लंबी लाइन में खड़े देखा गया.

हालांकि परिवार के कुछ सदस्य मोदी के सबसे छोटे भाई प्रह्लाद मोदी से दूरी बनाए रखते हैं. वे सस्ते गल्ले की एक दुकान चलाते हैं और गुजरात राज्य सस्ता गल्ला दुकान मालिक संगठन के अध्यक्ष हैं. वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के मामले में मुख्यमंत्री मोदी की पहल से नाराज रहते हैं और दुकान मालिकों परछापा डालने के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं.
मोदी जी से पहले सिर्फ एक ही अपवादित प्रधानमंत्री ऐसे रहे है जिनके परिवार ने ,घर के एक सदस्य के प्रधानमंत्री होने के बावजूद भी सामान्य जीवन जिया है  वो है डॉक्टर मनमोहन सिंह ,१० वर्ष तक प्रधानमंत्री रहने के बावजूद परिवार  के सदस्यो ने  सामान्य  जीवन जिया है उनकी दोनों बेटियां सत्ता से कोसो दूर रही है और बतौर शिक्षक अपने पेशे के प्रति पूरी ईमानदारी और निष्ठां के साथ काम कर रही है|