दिवाली का होगा खुशियों का त्यौहार

दीवाली एक धार्मिक पर्व है जो पूरे भारतवर्ष में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। विविध रंगों के प्रयोग से रंगोली सजाने, प्रकाश और खुशी का, अंधकार हटाने का, मिठाइयों का, पूजा आदि का त्यौहार है, जो पूरे भारत को एक साथ जोड़ कर रखता है और हर छेत्र में मनाया जाता है। यह रोशनी अर्थात प्रकाश का त्यौहार। यह सम्पूर्ण विश्व में मुख्यतः हिन्दुओं और जैनियों द्वारा मनाया जाता है। उस दिन बहुत से देश जैसे तोबागो, सिंगापुर, सुरीनम, नेपाल, मारीशस, गुयाना, त्रिनद और श्रीलंका, म्यांमार, मलेशिया और फिजी में राष्ट्रीय अवकाश होता है।

भगवान की पूजा और दीप प्रज्वलित कर प्रकाश की ओर ले जाता है, हमें अच्छे कार्य करने का शक्ति देता है, दीवाली कस त्योहार बताता है अंधेरा चाहे जितना व गहरा हो छोटे से दिये से व रोशनी लाई जा सकती है।  भगवान का नाम लेते हुए पूजा को आरंभ किया जाता है। घर के चारों ओर दिये और मोमबत्ती सजाये जाते है और उससे प्रकाशित कर घर के प्रत्येक कोनों को उज्वल किया जाता है। यह माना जाता है कि इस दिन पूजा करना और अपने करीबीयो और प्रियजनों को उपहार दिया जाता है  बिना ऐसा किये यह त्यौहार अधूरा से लगता है। त्यौहार की शाम लोग देवी-देवताओं का आशीर्वाद पाने के उद्देश्य से भगवान की पूजा अर्चना करते है। दीवाली का त्यौहार वर्ष का सबसे सुंदर और प्रकाशित समय एहसास दिलाता है जो मनुष्य के जीवन में असली खुशी के पल प्रदान करता है।

दीवाली के त्यौहार पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाता है ताकि सभी अपने मित्रों, परिवार एवं बच्चों के साथ त्यौहार का आनन्द ले सकें। लोग इस त्यौहार का बहुत लम्बे समय से इंतजार करते है और इसके नजदीक आते ही लोग अपने घरों, कार्यालयों, कमरों, गैराजों को रंगवाते और साफ-सफाई कराते है और अपने कार्यालयों में नयी चेक बुक, डायरी और कलैण्डर वितरित करते है। वे मानते है कि साफ सफाई और त्यौहार मनाने से वे जीवन में शान्तिः और समृद्धि प्राप्त करने में सक्षम होंगे। सफाई का वास्तविक अर्थ दिल के हर कोने से सभी बुरे विचारो, स्वार्थ और दूसरों के बारे में कुदृष्टि की सफाई से है अर्थात किसी से कोई मन मुटाव नहीं रखना चाहिए।


व्यापारी अपने वर्ष के खर्च और लाभ जानने के लिये अपने बचत बुक की जँचा करते है। शिक्षक किसी भी विषय में अपने छात्रों की प्रदर्शन और प्रगति का निरीक्षण करते है और उन्हें आगे बढ़ते रहने का रसाता दिखाते है। लोग उपहार देने के माध्यम से दुश्मनी हटाकर सभी से दोस्ती करते है। कॉलेज के छात्र अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और रिश्तेदारों को दीवाली कार्ड और एम-एम एस द्वारा भेजते है। आज कल लोग में इंटरनेट के माध्यम से दीवाली ई-कार्ड या दीवाली एसएमएस भेजने का सबसे लोकप्रिय चलन बन गया है। भारत में कुछ स्थानों पर दीवाली के मेले भी आयोजित किये जाते है जहां लोग आनंद के साथ नए कपड़े, हस्तशिल्प, कलाकृतियाँ, दीवार के अनोखे पर्दे, गणेश और लक्ष्मी की प्रतिमा, रंगोली, गहने और उनके घर के अन्य जरूरी चीजों के पोस्टर खरीदने के लिये बाज़ार का रुख करते है।

घर के बच्चे एनीमेशन फिल्म देख कर, अपने दोस्तों के साथ चिङिया घर घूम कर आते है, दीवाली पर कविता गा कर, माता पिता के साथ आरती करके, रात को पटाखों की आतिशबाजी करके, दिये और मोमबत्ती जला कर घर के हर हिस्से को रोशन करकते है, हाथ से बने दीवाली कार्ड परिजनों में बाटकर, तरह-तरह के खेल- खेल कर यह त्यौहार मनाते है। घर पर माँ आंगन के बीच में रंगोली बनाती है, नयी और आकर्षक मिठाईयॉ, नये प्रकार के  व्यंजन जैसे गुँजिया, लड्डू, गुलाब जामुन, जलेबी, पेड़े और अन्य तरह के लज़ीज व्यंजन बनाती है।

दीवाली कब मानते है?

हिंदू कैलंडर के अनुसार दीवाली का पावन पर्व अश्विन के महीने में कृष्ण पक्ष की 13 वें चंद्र दिन (जिसे अंधेरे पखवाड़े के रूप में जाना जाता है) पर मनाया जाता है। यह परम्परागत रुप से हर साल मध्य अक्टूबर या मध्य नवम्बर में दशहरा के 18 दिन के बाद मनाया जाता है। यह हिन्दुओं का बहुत महत्वपूर्ण व विशाल  त्यौहार है।

 

दीवाली का त्यौहार बहुत सारी खुशियों के साथ आता है और 5 दिनों से अधिक समय धनतेरस से भाई दूज पर पूरा होता है कुछ। स्थानों पर जैसे कि महाराष्ट्र में यह छह दिनों में पूरा होता है (वासु बरस या गौवास्ता द्वादशी के साथ शुरू होता है और भी दूज के साथ समाप्त होता है)।

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