आज पता चला लोग क्यों कोर्ट कचेरी से इतना दूर भागते है

बात अभी कुछ दिनों पहले की है मेरे घर पे चोरी हो गयी थी| मेने अपने नजदीकी पुलिस थाने में जाकर इसकी FIR करवा दी | पुलिस वालो ने छान बीन शुरू की | मेरे यहाँ से कोई खास सामान भी चोरी नहीं हुआ था तो में इतना ज्यादा चिंतित भी नहीं था | बस कुछ 20-22 हजार का सामान था तो मेने छोड़ दिया| पुलिस ने अपना काम बखूभी किया और चोर को गिरफ्तार भी कर लिया |

बात अब शुरू होती है|मुझे मेरे सामान की शिनाख्त करने के लिए पुलिस थाने बुलाया गया| में गया, मुझे अवगत कराया गया की जिस चोर ने चोरी करी थी वो पकड़ा जा चूका है और पुलिस की गिरफ्त में है और अब जेल में अपनी सजा काट रहा है|मेने उनको बधाई दी तभी उन्होंने बताया की उसके पास से कुछ सामान बरामद हुआ है आप पहचान कर ले अगर आपका है तो आप लेले| मेने सामान की शिनाख्त की और सामान मेरा ही था मेने पहचान लिया| उन्होंने मुझे कहा की आप सामान कोर्ट से छुड़ा लीजिये| मेने कहा ठीक में छुड़ा लेता हु| में अभी तक कोर्ट के रवैये के प्रति अनजान था


मेने एक वकील से इस सिलसिले में बात की और उसने कहरवाई शुरू की| न्याय पालिका में मुझे छोटी छोटी चीजों के लिए पूरे दिन घुमाया | मुझे मेरे ही सामान की और मेरी पहचान बताने के लिए २ गवाह लाने पड़े| उस दिन मुझे पता चला क्यों हमारे देश में कोर्ट में केस सालो साल चलते रहते है | न्याय पालिका के अनुसार एप्लीकेशन दाखिल करने का समय 10 – 12 PM और न्याय धीश के पास सुनवाई का समय 3-5PM था मुझे शाम तक 1-1 चीज में कमी बता बता के बार बार इधर से उधर दौड़ाया जा रहा था | मुझे शाम तक ये एहसास होने लगा था की शायद मेने कोई बहुत बड़ी गलती कर दी |

मुझे ये समज नहीं आया इसमें न्यायधीश का क्या काम था | मेरा सामान था मेने पहचान कर दी सामान की बिल मेरे पास थे | मुझे मेरे ही सामान को वापिस लेने के लिए 2000 रुपये खर्चने पड़े 500 वकील 500 पुलिस की चाय – पानी 200 – एप्लीकेशन वेरीफाई 300 स्टाम्प और बाकि इधर – उधर में लग गए |

और शाम तक ये समझ आ गया की कोर्ट- केचेरी से दूर ही रहना चाहिए |क्या कानून में ऐसा कोई उपाए नहीं है जिस से इन तरह के केस को न्यायधीश तक क्यों जाये और क्या जरूरत है न्यायधीश इसमें | क्या आपके पास है कोई जवाब , आप के जवाब का इंतजार रहेगा |

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